(Few words are enough to describe feelings, LOVE or ink from whole world is unable to describe; both things are true.
I hope these few three liners are capable to show feelings, thats why im writing. I hope you will like these 'TRIVENIs')
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लड़की, लड़की कह चिड़ाने लगे हैं लोग.
लगता है मेरे जिस्म से भी अब तेरी खुशबू आती है.
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मैं खुश हूँ कलम तो साथ है मेरे.
शुक्र है नज्में ख़ूनी नहीं होती.
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तेरे दिए ज़ख्म इतने बुरे भी नहीं,
चलो अच्छा है दूर से पहचान लेंगे लोग.
सुना है लाल रंग बड़ी दूर से दिखता है.
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टपकती छट ने सारा बिस्तर भिगो दिया,
फिर भी ये मौसम सुहाना लगता है.
मेरे आँसू कोई नहीं पहचान पाता बारिश में!
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पहाड़ दूर से देखा, बहुत सुन्दर था,
पास गये, पैरों में फफोले पड़ गये.
तू दूर है तो अच्छा है!!
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यूँ ना गम के आँसू बहाव आशिक,
कलम में डुबा कुछ उकेर दो इनसे.
सुना है दर्द में नज्में खूबसूरत बनती हैं.
~V!Vs **
14 comments:
well you have mastered the art of trivenis...each and every triveni is intense and profound
and the best is
तेरे दिए ज़ख्म इतने बुरे भी नहीं,
चलो अच्छा है दूर से पहचान लेंगे लोग.
सुना है लाल रंग बड़ी दूर से दिखता है.
what a co-relation!!!hats off!
टपकती छट ने सारा बिस्तर भिगो दिया,
फिर भी ये मौसम सुहाना लगता है.
मेरे आँसू कोई नहीं पहचान पाता बारिश में!
........kya baat hai.......
sunder abhivykti ............
dil toota ho aur man udas to lagta hai saaree kaynath hee humare saath ro rahee hai......sahanubhuti me.........
dil se likha hai isiliye dil tak pahunchta hai. badhayi
jaane kyo esa is jahan me hota hai, jo dard deta hai wahi rota hai. jindgi bhar saath nibha na sake jo , jaane kyo pyar usi se hota hai
आपका शुक्रिया, नहीं मै कोई कवयत्री नहीं हू ....
आपकी रचनाये तो बहुत सुन्दर है ...
मुझे ये पंक्तिया पसंद आई..
तेरे दिए ज़ख्म इतने बुरे भी नहीं,
चलो अच्छा है दूर से पहचान लेंगे लोग
वाह, क्या लिखते हैं,मार्मिक अभिव्यक्ति है।
जबसे तनहा तड़पा हूँ याद में,
लड़की, लड़की कह चिड़ाने लगे हैं लोग.
लगता है मेरे जिस्म से भी अब तेरी खुशबू आती है.
nice lines........accept i want last line more simple n short.....although ur all trivenies are very nice. keep writing, blogging and updating me.
तूने साथ छोड़ा मेरा, कोई गिला नहीं,
मैं खुश हूँ कलम तो साथ है मेरे.
शुक्र है नज्में ख़ूनी नहीं होती.
hey, this is also a nice triveni......
i like ur all posts, specialy yha mei vha vo. U knw hw many poems u posted? Total 27 poems. One is repeated. U r gud poet, keep writing.
आपकी टिपण्णी के लिए आपका आभार ...अच्छी कविता हैं...बहुत अच्छी .
यूँ ना गम के आँसू बहाव आशिक,
कलम में डुबा कुछ उकेर दो इनसे.
सुना है दर्द में नज्में खूबसूरत बनती हैं.
बहुत खूब आपका ब्लॉग अभी पढ़ा यह विधा मुझे बेहद पसंद है ...यहाँ लिखा हर भाव एक गहरे एहसास में ढला हुआ है ..बेहतरीन सभी एक से बढ़ कर एक ..शुक्रिया
यूँ ना गम के आँसू बहाव आशिक,
कलम में डुबा कुछ उकेर दो इनसे.
सुना है दर्द में नज्में खूबसूरत बनती हैं.
सच है ... दर्द में नाज़्में अपने आप निकल आती हैं .. सब लाइने लाजवाब हैं ...
शुक्र है नज्में ख़ूनी नहीं होती....aisa nai dost...your every trivenis ka killer....
koi humse pucho...hum mare kai baar hai
har ada kaatil teri, kaatil tu meri yaar hai
ye hai kahai aapke nazm ki.
mature writing...beautiful thaught...
www.kavyalok.com
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तूने साथ छोड़ा मेरा, कोई गिला नहीं,
मैं खुश हूँ कलम तो साथ है मेरे.
शुक्र है नज्में ख़ूनी नहीं होती.'
'मेरे आँसू कोई नहीं पहचान पाता बारिश में!'
बड़े नाजुक मिजाज हो भई.और कितनी प्यारी प्यारी बाते कह गए हो. कुछ शे'र (शे'र ही कहते हैं न इन् पंक्तियों को?) बड़े खूबसूरत बन पड़े हैं.
जैसे किसी ने नश्तर चला कर गहरे तक छील दिया हो कई जगह से और ढेर सारे...आंसूं बह निकले जख्मों मे से....
बाबा! सचमुच गहरी पीड़ा है शब्दों मे. ये शब्दों का खेल है दूसरों की तरह या सचमुच तुम्हारा अंतर्मन नही जानती .यदि वो ही है तो कुर्बान जाऊं इतने खूबसूरत दिल को बनाने वाले पर.
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